जे रंगों की बात है…

आर्टोलॉग की यात्रा के दौरान फेसबुक पर कई मित्र बने हैं जिनसे हम कभी नहीं मिले. फेसबुक के इनबॉक्स में बातें होती रहींं. वो पूछते रहे. हम बताते रहे अपने बारे में. ऐसा ही एक लड़का है विकास त्रिवेदी..वो कभी कभी कुछ पूछ लेता था और हमेशा कहता- आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. ये छोटी छोटी हौसला अफज़ाई बड़े काम की होती है. हम जब कश्मीर से लौटे तो इनबॉक्स में ये पड़ा था जो विकास ने लिख भेजा था..ये कहते हुए कि मेरा मन किया तो भेज दिया.. मैंने पढ़ा तो अच्छा लगा. आप सबसे शेयर कर रहा हूं विकास का ये लिखा हुआ.

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झा नहीं जे. जे रंगों की बात है….

रंग. मछली. सुशील-मीनाक्षी. रंग-बिरंगी मछली.

कुछ दीवारें…..दीवारों पर कुछ न समझ में आनेवाली पेंटिग्स, इन शॉर्ट मॉर्डन आर्ट, जिसकी समझ मुझे आज भी नहीं है. पर मुझे मछली और रंग समझ आते हैं तो इनकी डाली कुछ तस्वीरें समझ आ रही थीं.

Artolouge, मीनाक्षी और इस एक जैसी हाइट वाली कपल की तस्वीरें. अमूमन एफबी पर जो फोटू और पोस्ट मुझे सबसे ज्यादा अपने पास टिकाकर रखती हैं वो हैं प्रेमी जोड़े. और वो जोड़े जित्ते ज्यादा सावन देखे हुए होते हैं मेरी दिलचस्पी उन दोनों में उत्ती ही बढ़ती है.

किसी आर्ट गैलरी में एक-दूसरे को निहारते ये दो तोते मुझे लुभा गए. ज़्यादा घुसा तो आर्टोलॉग मिला…और घुसा तो रंग मिले..खूब सारे रंग..रंगों के साथ कुछ शब्द भी मिले…काले शब्द,जो कुछ कह रहे थे, ये शब्द और रंग एक दूसरे की बाहों में बाहें डाले अपने किस्से सुना रहे थे.

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प्यारे किस्से. मैंने यहां से आर्टोलॉग को पहचाना.

जेएनयू में ट्री (The Tree of life in JNU) बनाने वाले प्रोग्राम ने मुझे खींच लिया..लगा कि यार इन दोनों को किसी दिन मैग्सेसे अवॉर्ड मिलना चाहिए. कहा  भी था जे से.

इनबॉक्स-अलादीन का चिराग. जो पूछो..जो कहो.. जो गरियाओ..जो ढकेलो..जो मतलब…जो.

जे जवाब देंगे.

एक लंबी पोस्ट डाली समझ नहीं आई, प्रिंट लें या न लें. मैसेज चिपका दिया. इत्ती तेजी से किसी बाबा सीनियर ने आजतक रिप्लाई नहीं किया था. बाबा ने रिप्लाई  भी किया और हाल चाल लिया. अच्छा लगा था. पहली बात थी वो हमारी.

इसके बाद कई बार बात हुई थी. जे बाबा सीनियर श्रेणी के पहले ऐसे योद्धा थे जिनसे कुछ लिखकर कहने से मैं कभी डरा नहीं.

ए ट्रिप टू साउथ इंडिया विद हरी बुलैट एंड हिज़ फ्रेंड मीनाक्षी. मटरगश्ती कोई इस उम्र में आकर भी कर सकता है, ये हमने वाया फेसबुक जे की जर्नी में देखा. दावे से कह सकता हूं कि बहुतों की उस ट्रिप में जली होगी कि ये लोग इत्ते खुश कैसे हो सकते हैं,रह लेते हैं. हमई बात  अलग है हमें तो प्रेमी जोड़े ही सुकून पहुंचाते हैं.

रंग सिर्फ छुए नहीं जाते हैं देखकर चखे भी जाते हैं इन दोनों का प्यार और हरकतें (कलाबाजी) मुझ जैसे कई लोगों को रंग चखा रहे थे.

मुझे पेंटिंग बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है, पर देखने में है. चाहता हूं कि आर्टोलॉग फलता-फूलता रहे. चलता रहे. रंग की डिबिया बिखरती रहे. कुछ कोरा नहीं बचना चाहिए. कुछ भी नहीं क्योंकि रंग बेहद प्यारे लगते हैं मुझे.

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रंग जैसे रहना जे-मीनाक्षी. रंग जो जहां जाते हैं सबको अपने जैसा कर लेते हैं. खुशियों के रंगों को भी बिखेरते रहना. एक ख्वाहिश है. ख्वाहिश पढ़कर मुझे चाची-दादी-नानी ना समझ लेना. विकास ही समझना. ख्वाहिश है कि मैं वो दिन देखना चाहता हूं जब आप दोनों की बगिया में एक तीसरा जे आएगा.

मीनाक्षी जे. सुशील जे और क्यूटी पाई जे.

मैं इंतज़ार कर रहा हूं उस दिन का जब वो आएगा/ आएगी..और अपने नन्हे हाथों से मछलियों को बिगाड़ेगा, जब वो सुशील की दाढ़ी खींचेगा और मीनाक्षी उसकी फोटू खीचेंगी.

झोले में रंग की डिबिया बढ़ेंगी तो खुशियां भी बढ़ेंगी इसीलिए ये ख्वाहिश उपजी है. क्यूटी पाई जे के आने तक आप दोनों अपनी रंगों को डिबिया लिए भटकते रहो. तुम्हारा भटकना लोगों को रंग रहा है. उनके कोरेपन को दूर कर रहा है, खुशियां ला रहा है.

तो प्लीज़ आर्टोलॉग कैरी आन….रंग दो दुनिया. रंगना ऐसे कि जब अंतरिक्ष से नासा वाले देखें तो उन्हें सिर्फ रंग दिखे. सिर्फ रंग.

विद लव विकास.

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