Going back to the Roots…

The new cartoon by Ashok Adepal

The new cartoon by Ashok Adepal

अगर हम अंग्रेज़ होते तो लिखते कि Travelling to the most notorious part of India, which is Bihar. लेकिन हम अभी अंग्रेज़ नहीं हुए हैं तो कहना ये है कि इस बार यात्रा बिहार और झारखंड की है. जो हम दोनों के लिए जड़ों की ओर लौटने जैसा है.

झारखंड-बिहार की यात्रा को लेकर डरे हुए तो नहीं हैं लेकिन हां आर्टोलॉग और उसके रिस्पांस को लेकर थोड़ी दुविधा ज़रुर है. इस बार मामला थोड़ा अलग भी है.

वैसे इस दुविधा को दूर करने के लिए विकास कुमार ने खूब तस्वीरें खींची. हम अक्सर जब तनाव में होते हैं तो विकास आ जाता है और फोटो खींच कर मन हल्का कर देता है. सारी तस्वीरें विकास की ही ली हुई हैं.

Meenakshi did this quick painting in deer park.

Meenakshi did this quick painting in deer park. Picture Credit- Vikas Kumar

बिहार में वो लोग हमारी मदद कर रहे हैं जिनसे फेसबुक के ज़रिए मित्रता हुई है और उन्होंंने आर्टोलॉग को बिहार ले चलने की बात की. चाहे वो गिरिन्द्र हों, बिदेशिया रंग हों, अमित आनंद हों या फिर शेखर हर्षवर्धन हों.

जाना इलाहाबाद, बनारस भी था लेकिन छु्ट्टियां इतनी भी नहीं मिलती है.

वैसे हम जानते हैं कि यात्रा शुरु होते ही जे के लिए वो ही सवाल फिर आएंगे. उन्हें इतनी छुट्टी कैसे मिल जाती है…आपसे इर्ष्या होती है आदि आदि.

In a foggy morning in Deer park, Delhi.

In a foggy morning in Deer park, Delhi.

इन सवालों से इतर जे चिंतित है अपनी बुलेट को लेकर. गियर बॉक्स की समस्या पूरी तरह से दूर नहीं हुई है.

कल ट्रेन है और बुलेट को एक बार फिर मैकेनिक के पास ले जाना है. सबसे अधिक तनाव जे को उसी का है.

खैर रास्ता कुछ यूं है पटना से वैशाली….वैशाली से मुज़फ्फरपुर……मुज़फ्फरपुर से महिषी…..महिषी से पूर्णिया…पूर्णिया से भागलपुर…..और भागलपुर से रांची.

2 and 2 four...

2 and 2 four…

अब इस रास्ते में जिसे जहां रोकना हो रोक ले मिल ले…पेंटिंग हर जगह कर पाएंगे इसकी गारंटी नहीं है.

लेकिन हां आर्टोलॉग के बारे में बात ज़रुर कर पाएंगे. कोई एक रात रोक ले…कोई दिन का भोजन करवा दे…कोई रात का खाना खिलवा दे…

समझिए कुछ जिप्सियों जैसा ही मामला रहेगा.

Meenakshi feels happy when she is painting

Meenakshi feels happy when she is painting

भागलपुर से रांची के बीच में कहीं रुकने की जगह अभी तक मिली नहीं है. अगर उस रास्ते में कोई मित्र हो तो हमें रोक सकता है. एक रात उनके घर बिताएंगे.

बाद बाकी झारखंड में जे रहे हैं लंबे समय तक. जमशेदपुर के पास जादूगोड़ा में और मीनाक्षी भागलपुर के पास सुल्तानगंज  में.

Meenakshi is engrossed in the canvas

Meenakshi is engrossed in the canvas

इस यात्रा में अपनी जड़ों से सीखने को बहुत कुछ मिलेगा. इसी उम्मीद में यात्रा शुरु करते हैं और आपसे मांगते हैं शुभकामनाएं.

हमारे रंग अब शुरु होते हैं. ठीक होली के बाद…हमारी रंगों की होली कई हफ्तों तक चलेगी.

so we are done with the shoot.

so we are done with the shoot.

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